पोखरण हमारा वह इतिहास है, जिसे याद कर हर भारतीय खुद को सम्मानित महसूस करेगा..!
अटल बिहारी वाजपेयी को अबतक
के हुए भारत के सभी प्रधानमंत्रियों में सबसे ज्यादा लोकप्रिय माना जाता है. उनकी
नीति, बोलने का लहजा, विरोधियों से संवाद के तरीके सबसे अलग और सबसे जुदा होते थे.
उनमें इतनी आत्मीयता होती थी की विपक्षी भी
मंत्रमुग्ध हो जाते थे। 11 मई 1998 को पोखरन में दूसरा परमाणु परीक्षण किया गया था. ये परीक्षण इसलिए अहम था क्योंकि इसने पूरी दुनिया के सामने भारत
की छवि को बदल कर रख दिया था. उस दिन दुनिया ने समझा कि
भारत तेजी से उभरता ताकत है. और इसके सूत्रधार कोई और नहीं बल्कि तत्कालीन
प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ही थे।
भारत के लिए यह परमाणु परीक्षण इतना आसान
भी नहीं था क्योंकि अमेरिका हर पल नजर लगाए बैठा था. लेकिन बेहद चालाकी से भारतीय
वैज्ञानिक और सेना ने इस काम को अंजाम दिए। इससे पहले 1974 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारत के पहले परमाणु परीक्षण के लिए हरी
झंडी दे दी। इसके लिए बी स्थान चुना गया था राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित
छोटे से शहर पोखरण के निकट का रेगिस्तान और इस अभियान का नाम दिया गया मुस्कुराते
बुद्ध। इस नाम को चुने जाने के पीछे यह स्पष्ट दृष्टि थी कि यह कार्यक्रम
शांतिपूर्ण उद्देश्य के लिए है।
18 मई 1974 को यह परीक्षण हुआ। परीक्षण से पूरी दुनिया चौंक उठी,
क्योंकि सुरक्षा परिषद में बैठी दुनिया की पांच महाशक्तियों
से इतर भारत परमाणु शक्ति बनने वाला पहला देश बन चुका था। इस परीक्षण में राजा
रमन्ना के नेतृत्व में भारत के मेधावी परमाणु वैज्ञानिकों पीके आयंगर, राजगोपाल चिदंबरम, नागपत्तानम सांबशिवा
वेंकटेशन, वामन दत्तात्रेय पंट्टवर्धन, होमी एन. सेठना आदि की टीम ने अपनी
पूरी मेधा झोंक दी। इस टीम के राजगोपाल चिदंबरम बाद में
एपीजे अब्दुल कलाम के साथ पोखरण-2 के सूत्रधारों में थे। भारत के परमाणु परीक्षण की पूरी दुनिया में प्रतिक्रिया हुई। पाकिस्तान ने इसे
धमकी भरी कार्रवाई करार दिया तो कुछ अन्य देशों ने परमाणु होड़ बढ़ाने वाला बताया,
जबकि कुछ अन्य चुप्पी साध गए।
आज पोखरण- 2 परीक्षण के
उन्नीस साल हो चले हैं मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी ने ट्वीट करते हुए कहा
कि बहुत कम ऐसे नेता हुए हैं जिन्होंने अटल जी जैसा साहस दिखाया है। बता दें कि 11
मई को हर साल राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया जाता है. पीएम मोदी ने अपने वेबसाइट में
लिखा था कि परीक्षणों की पहली श्रृंखला के बाद विश्व समुदाय ने भारत पर प्रतिबंध
लगाए थे. मगर 13 मई 1998 को अटल जी ने फिर परीक्षण किया. जिससे यह पता चलता है कि वह अलग मिजाज के
व्यक्ति हैं. अगर हमारे पास एक कमजोर प्रधानमंत्री
होता तो वह उसी दिन डर गया होता. लेकिन अटल जी अलग ही व्यक्ति हैं वह डरे
नहीं. एक छोटे से पोखरण को हम कभी भूल नहीं सकते क्योंकि हमारी ऐसी
यादें यहाँ से जुड़ी हैं जो हमें हमारी ताकत का अहसास कराता है, हमें यह यकिन
दिलाता है कि हम एक परमाणु संपन्न राष्ट्र हैं और हम किसी भी दूसरे देश की आँखों
में आँखे डालकर बात कर सकते हैं।

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