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Showing posts from March, 2014

तेरी कह के.................. लूंगा...!

जिस तरह भगवान को अपने भक्तों पर नाज है, समंदर अपनी लहरो को देखकर मचलती है जरा सोचिये अगर भक्त भगवान के खिलाफ हो जाए, लहरें समंदर से इत्तिफाक न रखे तो क्या होगा ? शायद तब समंदर का अस्तित्व ही न रहें और भगवान अपने वजूद को लेकर सोच में पड़ जाएंगे। भारत के राजनीतिक गलियारे मे आज एक आम आदमी की हालत कुछ इसी तरह है मानो वो नेता बनकर राजनीति से ही बगावत कर बैठा है वही राजनीति जिसमें अधिकांश राजनेता अपने चारों धाम देखते हैं, इसी की खाते हैं और इसी की मक्कारी से जनता की लेते हैं ।                              अरविंद केजरीवाल का राजनीति मे आना ही भारत के इतिहास मे एक अहम अध्याय बन गया है इसलिए नहीं कि यहाँ से एक नई राजनीति की शुरूआत हुई है बल्कि इसलिए कि ज्यादातर स्थापित नेताओं की राजनीति बदलने लगी है । भले ही अरविंद केजरीवाल को कोई राजनीतिक पार्टी सामने से चुनौती नही मान रही हो लेकिन अंदर ही अंदर सबकी फटी पड़ी है । अरविंद भी इस बात को जान गए और राज...