तुम भूल गये.....कुछ सत्ता है नारी की...!
"तुम भूल गये पुरूषत्व मोह में कुछ सत्ता है नारी की" संभवत: जयशंकर प्रसाद ने यह पंक्ति तब लिखी होगी जब नारी का समाज मे कोई स्थान नहीं था,तभी वो उस दौर मे नारी के लिए कुछ सत्ता की मांग उस सामंतवादी समाज से कर रहे थे । लेकिन आज इस दौर मे समाज भी बदला है और कुछ हद तक नारी को सत्ता भी मिली है, फिर भी स्थिति पहले से भयानक है। कल तक औरत को औरत समझा जाता था तभी सत्ता दिलाने की बात होती थी आज तो औरत "औरत" ही न रही। ...