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Showing posts from May, 2015

काश...! दादी ने शहर की कहानी सुनाई होती

कहते हैं फिल्में समाज का दर्पण होती हैं मतलब समाज मे जो कुछ घटित होता है, समाज की जो भी असलियत है, जितनी संवेदना है , जैसी भी अवधारना  है, फिल्में ठीक वैसी ही परोसती हैं । कभी-कभी तो हर आदमी की कहानी ही फिल्मी लगती है और लगता है ये “ फिलम ” वाले हमारे घरों से ही कहानियाँ चुराकर हमें परदे पर दिखाते हैं, हमे इस बात का अहसास कराते हैं कि देखो जिंदगी तुम्हारी ही है, हमने बस अपने जीने का तरीका तुम्हारी जिंदगी से सिखा है । हालांकि हम और आप यह भी नही कह सकते कि फलाना फिल्म हमारी जिंदगी पर बनी है क्योंकि ऐसे लाखो लोग हैं जो इस तरह की जिंदगी जी रहे हैं, । भारत की जितनी आबादी है और जितने लोग यहाँ रहते हैं इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह लोग यहाँ जीवन-यापन करते हैं,कैसे रहते हैं, ख्वाब देखना तो दूर अपने बच्चों के पेट कैसे पालते हैं ?  स्वाभाविक है गाँव में रहने वाले लोग शहर इसलिए आते हैं ताकि वे अपनी जिंदगी सुधार सके, अपने बच्चों को भले कीमती खिलौने न दे पाएं पर उतनी शिक्षा और संस्कार अवश्य देकर जाए जितने मे उसका बच्चा इस शहर की असली सूरत पहचान ले और शहर मे रहना सिख जाए। ...

मुख्यमंत्री होना भी "जंग" है

दिल्ली के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच चल रही तकरार के मायने और इससे होने वाले नुकसान का तकाजा समझना अभी मुश्किल है जबतक कि इन दोनो से जुड़े कानूनी दाव-पेंच को ठीक से समझ न लिया जाए। मालूम हो कि दिल्ली सरकार को वो सारे अधिकार प्राप्त नही हैं जो कि अन्य भारतीय राज्यों को मिले हुए हैं इस कारण केजरीवाल सरकार ही इसका अपवाद नही है बल्कि पिछली सरकारों का भी केन्द्र के साथ तकरार होता रहा है। इस वक्त नजीब जंग उपराज्यपाल हैं और पिछे हटने के मूड मे नही हैं केजरीवाल के हर फैसले को पलट कर वे इस बात को बार-बार जता भी रहे हैं। देखा जाए तो जंग और केजरीवाल दोनो ही पूर्व नौकरशाह रह चूके हैं और दोनो ने कुछ साल नौकरी करने के बाद अपने लिए अलग-अलग रास्ते चूने हैं आज जब दोनो एक दूसरे के सामने हैं तो इनके अधिकार इनकी तकरार का कारण बन रही है। जैसा कि हम जानते हैं दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नही प्राप्त है परंतु एक संविधान संशोधन के जरिए दिल्ली और पांडीचेरी को अन्य केन्द्रशासित प्रदेशों से परे विशेष दर्जा हासिल है। दिल्ली की अपनी विधानसभा है और कुछ विषयों को छोरकर जैसे कानून-व्यवस्था और भूमि से जुड़े ...