वो प्रधानमंत्री बनना चाहती है
अब जिंदगी जैसी भी है ,है तो अपनी ही न क्यों भैया जी गलत बोल रहे हैं । चेहरे पर हल्की मुस्कान, आखों में पानी, किसी से कोई शिकायत नहीं. ये जो आदमी मेरे सामने बैठा है कहने को तो मौची है जूता सिलता है वो भी डिबिये की लौ में .हमने कहा भैया कल हैप्पी न्यू ईयर है उसने कहा क्या फर्क पड़ता है साहब, आम को करेला कहेंगे तो वो करेला थोड़े न हो जाएगा. वैसे भी बच्चे और बीवी तो गांव मे ही हैं बहुत करेंगे तो खीर-पूरी बना के खा लेंगे. अब बच्चे क्या करें, हैं तो इसी दुनियां मे न अमीरों को देखकर कभी-कभी वो भी पगला जाते हैं, उनके जैसे ही जश्न मनाने की जिद कर बैठते हैं अब उनको कौन समझाए ये सारी चीजें हमारी औकात से बाहर का है। वकील बेगूसराय जिले के रहने वाले हैं, जी पेशे वाले वकील नहीं हैं बस नाम वकील है इनका . गांव में आपको कलेक्टर साहेब भी मिल जाएंगे बस नाम के. शादी हो चूकी है बीवी बच्चे घर पर ही रहते हैं , कहते हैं यहाँ रखने से क्या फायदा है भैया. झूठ-मूठ का किराया उपर से खाना-पीना बच्चे की पढ़ाई बहुते लफड़ा है. वकील यहाँ वैशाली में सड़क किनारे अपना छोटा सा दुकान चलाते हैं जो रोज सुबह दस बजे...