हाय रे देशभक्ति ...जो रे अच्छे दिनों के मालिक..!

जिस तरह समंदर का मिजाज कोई नही भॉप पाता है कि कौन सी कश्ती किनारे को लगेगी और कौन सी समंदर मे ही डूब जाएगी उसी तरह इसकी क्या गारंटी है कि आजादी के बाद पैदा लेने वाला हर भारतीय देशभक्त ही हो....? । खैर चलो आज - कल मे हम हिन्दुस्तानी बन जाते हैं बाकी साल भर तो हिन्दू-मुस्लिम, दंगा-फसाद, दलित- ब्राह्मण चलता ही रहता है। साल भर मस्त-मौला मस्त कलंडर सुनते रहेंगे लेकिन आजकल. ऐ मेरे वतन के लोगो, हम कसम खाते हैं कि रंग दे बसंती चोला ही गाएंगे पता नही क्यूँ बसंती चोला को इन्हीं दिनों रंगने की आरजू जगती है । पूरे साल मलाई मारका, स्पंज अपने तोंद मे डालेंगे लेकिन आजकल मे जलेबी पर जान मटकाएगें। वो मधुमक्ख्ियाँ जो साल भर जलेबी को लेकर जश्न मनाती है,गुनगुनाती है,गीत गाती है उसकी देशभक्ति बड़ी या हमारी क्षूद्रभक्ति.......??...........जनहित मे जारी..जागो देशभक्त जागो...!

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